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राणा रायमल

राणा रायमल मेवाड़ के एक राजपूत शासक थे। वह राणा कुंभा के पुत्र थे। उन्होंने मेवाड़ राज्य को मजबूत किया तथा एकलिंगजी, चित्तौड़ के मंदिर की भी मरम्मत करवाई।

राणा रायमल(1473–1509) मेवाड़ के एक राजपूत शासक थे। वह राणा कुंभा के पुत्र थे। उन्होंने मेवाड़ राज्य को मजबूत किया तथा एकलिंगजी, चित्तौड़ के मंदिर की भी मरम्मत करवाई।

राणा रायमल राजा कैसे बने?

रायमल और उदय सिंह प्रथम, महान राणा कुंभा के पुत्र थे। रायमल उदय सिंह से छोटा था, इसलिए वह उत्तराधिकारी नहीं था।

एक दिन जब राणा कुंभा एकलिंगजी मंदिर में पूजा कर रहे थे, तब उदय सिंह ने उनकी हत्या कर दी और पाँच वर्षों तक शासन किया। उदय सिंह एक कमजोर शासक था। उसके शासनकाल में, मेवाड़ ने अबू और अजमेर को खो दिया।

जवार, दरिमपुर, और पानगढ़ में लड़ाई में उदय सिंह प्रथम को हराने के बाद रायमल सत्ता में आए। रायमल से पराजित होने के बाद, उदय सिंह दिल्ली सुल्तान को खुश करने के लिए भाग गया और अपनी बेटी को वैवाहिक गठबंधन में दे दिया। लेकिन, शादी होने से पहले ही राजा की बिजली गिरने से मौके पर ही मौत हो गई। उनके बेटे सूरजमल और सहसमल उनके साथ थे।

राणा रायमल का शासनकाल

अपने शासनकाल के शुरुआती दौर में, मालवा के ग़यास शाह ने चित्तौड़ पर हमला किया लेकिन असफल रहा। ग़यास शाह के जनरल ज़फर खान ने भी मेवाड़ पर हमला किया, लेकिन मांडलगढ़ और खैराबाद में हार गए।

राणा रायमल ने राव जोधा की बेटी श्रृंगारदेवी से शादी करके राठौरों के साथ संघर्ष समाप्त कर दिया।

रायमल के शासन के अंतिम वर्षो में राजकुमार सांगा/राणा सांगा और उनके अन्य पुत्रो के बीच संगर्ष होने लगा। तब राणा सांगा वह से भाग गए। बाद में उनके दो बेटे – पृथ्वीराज और जयमल – मारे गए।

इस कठिन समय में, राणा रायमल को पता चलता है कि सांगा अभी भी जीवित था और छुप कर रह रहा था। रायमल ने सांगा को चित्तौड़ वापस बुलाया और उसके तुरंत बाद उसकी मृत्यु हो गई।

राणा रायमल की सुल्तान और उनके भतीजों से लड़ाई 

दिल्ली के सुल्तान, सिकंदर लोदी ने उदय सिंह के पुत्रों – सूरजमल और सहसल के साथ मिलकर राणा रायमल से युद्ध किया।

इस युद्ध में सुल्तान की हार हुई थी। सूरजमल बच गया और राणा रायमल ने उसे माफ कर दिया।

सदरी में लड़ाई 

सूरजमल और रायमल की सेनाएं सदरी में मिलीं, जो सूरजमल ने कब्जा कर लिया था। रायमल का पुत्र पृथ्वीराज अपने पिता के साथ युद्ध में महत्वपूर्ण समय पर शामिल हुआ और उसने सूरजमल पर सीधा हमला किया। दिन के युद्ध के बाद शाम को उनकी बातचीत एक राजपूत योद्धा के असली चरित्र का प्रतिनिधित्व करते हुए महाकाव्य थी।

सूरजमल ने अंततः मेवाड़ छोड़ दिया और प्रतापगढ़ में बस गए, जहां उनके वंश अभी भी “सिसोदिया” नाम से फलते-फूलते हैं। पृथ्वीराज को बाद में अबू देवरा प्रमुख द्वारा जहर देकर मार दिया गया और इस तरह जयमल की मृत्यु हो जाने पर संगा की वापसी के लिए रास्ता बना।

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