भारत में लॉर्ड रिपन व उनके द्वारा लाये गए सुधार
लॉर्ड रिपन 1880 से 1884 तक भारत के वायसराय थे। उन्होंने भारत में कई महत्वपूर्ण सुधार किये जैसे – स्थानीय स्वशासन, कारखाना अधिनियम, इत्यादि।
लॉर्ड रिपन 1880 से 1884 तक भारत के वायसराय थे। उन्होंने भारत में कई महत्वपूर्ण सुधार किये जैसे – स्थानीय स्वशासन, कारखाना अधिनियम, इत्यादि।
बाणभट्ट भारत में 7 वीं शताब्दी राजा हर्षवर्धन के दरबार में एक संस्कृत गद्य लेखक और कवी थे। बाणभट्ट के प्रमुख कार्य – हर्षचरितम् और कादंबरी।
अलीनगर की संधि ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के रॉबर्ट क्लाइव और बंगाल के नवाब, मिर्ज़ा मुहम्मद सिराज उद दौला के बीच 9 फरवरी 1757 को हुई थी।
सजदा और पैबोस एक प्रकार की प्रथा थी जिसे ग़यासुद्दीन बलबन ने अपने शक्ति के प्रदर्शन के लिए शुरू किया था। सजदा और पैबोस फारसी प्रथाएं थीं।
वैदिक साहित्य से तात्पर्य उस पूर्ण साहित्य से है जिसमें वेद, ब्राह्मण, अरण्यक एवं उपनिषद् शामिल हैं। वैदिक साहित्य को ‘श्रुति’ कहा जाता है।
प्राचीन भारतीय इतिहास को जानने में साहित्यिक श्रोतो का बहुत योगदान होता है। साहित्यिक श्रोते भरोसेमंद तथा कारगर साबित होते है।
इतिहास का प्रयोग विशेष दो अर्थों में किया जाता है – प्राचीन अथवा जिसे विगत काल की घटनाए कह सकते है और उन घटनाओं के विषय में जो धारणाएँ हैं
महाराणा मोकल सिंह मेवाड़ साम्राज्य के महाराणा थे। वह महाराणा लाखा सिंह के पुत्र थे, अपने पिता की तरह, महाराणा मोकल एक उत्कृष्ट निर्माता थे।
राणा लाखा राजस्थान के आधुनिक राज्य में एक शासक थे जो मेवाड़ के सिसोदिया वंश के थे। वह महाराणा क्षेत्र सिंह के पुत्र थे।