भारत की सबसे प्राचीन नगरी काशी (वाराणसी) को मोक्ष की भूमि कहा जाता है।
यहीं स्थित है काशी विश्वनाथ मंदिर, जो भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है।
मान्यता है कि जो व्यक्ति काशी में प्राण त्याग करता है, उसे मुक्ति (मोक्ष) प्राप्त होती है।
इसी कारण काशी विश्वनाथ मंदिर को
“मोक्ष का द्वार” कहा जाता है।
यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं,
बल्कि भारतीय संस्कृति, दर्शन और आस्था का जीवंत प्रतीक है।

काशी विश्वनाथ मंदिर का प्राचीन इतिहास
काशी का उल्लेख
- ऋग्वेद,
- अथर्ववेद,
- स्कंद पुराण
जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
ऐसा माना जाता है कि काशी की स्थापना स्वयं भगवान शिव ने की थी।
इसी कारण उन्हें यहाँ विश्वनाथ (संपूर्ण जगत के स्वामी) कहा जाता है।
इतिहास के दौरान यह मंदिर कई बार:
- तोड़ा गया
- नष्ट किया गया
- और फिर दोबारा बनाया गया
वर्तमान मंदिर का निर्माण 1780 ई. में
अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था।
संघर्ष और पुनर्निर्माण की कहानी
मध्यकाल में काशी विश्वनाथ मंदिर को कई आक्रमणों का सामना करना पड़ा।
औरंगज़ेब के समय इसे तोड़कर वहाँ ज्ञानवापी मस्जिद बनाई गई।
लेकिन शिवभक्तों की आस्था कभी कमजोर नहीं हुई।
वे किसी न किसी रूप में पूजा करते रहे।
यह मंदिर इस बात का प्रमाण है कि
आस्था को दबाया जा सकता है, समाप्त नहीं।

ज्योतिर्लिंग और धार्मिक महत्व
काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित ज्योतिर्लिंग को
सबसे पवित्र माना जाता है।
मान्यता है:
- स्वयं भगवान शिव यहाँ निवास करते हैं
- मृत्यु के समय वे भक्त के कान में तारक मंत्र देते हैं
- जिससे आत्मा को मोक्ष प्राप्त होता है
यही कारण है कि काशी को
अविमुक्त क्षेत्र कहा जाता है —
अर्थात जिसे शिव कभी नहीं छोड़ते।
गंगा, घाट और मोक्ष की अवधारणा
काशी विश्वनाथ मंदिर गंगा नदी के तट पर स्थित है।
यहाँ के प्रमुख घाट:
- मणिकर्णिका घाट
- हरिश्चंद्र घाट
मोक्ष से गहराई से जुड़े हैं।
यहाँ:
- जीवन और मृत्यु साथ-साथ दिखाई देते हैं
- चिता की अग्नि और मंदिर की घंटियाँ
एक साथ गूंजती हैं
यही काशी की विशेषता है।
मंदिर की वास्तुकला और वर्तमान स्वरूप
वर्तमान काशी विश्वनाथ मंदिर:
- नागर शैली में निर्मित है,
- शिखर पर सोने का कलश स्थित है,
- गर्भगृह में दिव्य ज्योतिर्लिंग स्थापित है।
हाल के वर्षों में बने काशी विश्वनाथ कॉरिडोर ने
मंदिर को और भव्य तथा सुगम बना दिया है।
दर्शन के लिए महत्वपूर्ण बातें
अगर आप काशी विश्वनाथ मंदिर जाएँ, तो ध्यान रखें:
- सुबह की मंगला आरती विशेष मानी जाती है।
- सावन मास और महाशिवरात्रि पर भारी भीड़ होती है।
- गंगा स्नान के बाद दर्शन का विशेष महत्व है।
- मंदिर परिसर में शांति और मर्यादा बनाए रखें।
काशी का आध्यात्मिक संदेश
काशी सिखाती है कि:
- मृत्यु अंत नहीं, एक यात्रा है
- जीवन क्षणभंगुर है
- और सत्य शिव ही हैं
इसीलिए कहा गया है:
“काश्यां मरणं मुक्तिः”
(काशी में मृत्यु ही मुक्ति है)
निष्कर्ष
काशी विश्वनाथ मंदिर केवल पत्थरों से बना ढांचा नहीं,
यह आत्मा और ब्रह्म के मिलन का स्थान है।
यह मंदिर हमें यह याद दिलाता है कि
चाहे समय बदले, सत्ता बदले,
लेकिन सनातन आस्था अडिग रहती है।
काशी विश्वनाथ वास्तव में
मोक्ष का द्वार और भारत की आध्यात्मिक आत्मा है।