भारत के गुजरात राज्य के सौराष्ट्र तट पर अरब सागर के किनारे स्थित सोमनाथ मंदिर
केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि यह भारतीय आस्था, साहस और पुनर्जन्म की प्रतीक गाथा है।
यह मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में पहला माना जाता है।
इतिहास में शायद ही कोई ऐसा मंदिर हो, जो
- बार-बार तोड़ा गया,
- बार-बार लूटा गया,
- और फिर भी हर बार पहले से अधिक भव्य रूप में खड़ा हुआ।
सोमनाथ मंदिर हमें सिखाता है कि
आस्था को तोड़ा जा सकता है, मिटाया नहीं।

सोमनाथ मंदिर का प्राचीन इतिहास
सोमनाथ मंदिर का उल्लेख,
- ऋग्वेद,
- स्कंद पुराण,
- शिव पुराण
जैसे प्राचीन ग्रंथों में मिलता है।
पौराणिक कथा के अनुसार,
चंद्रदेव ने भगवान शिव की आराधना करके यहाँ यह ज्योतिर्लिंग स्थापित किया था।
इसी कारण इसका नाम पड़ा — सोमनाथ (सोम = चंद्र, नाथ = स्वामी)।
प्राचीन काल में यह मंदिर
सोने से बना हुआ माना जाता था और अत्यंत समृद्ध था।
महमूद ग़ज़नवी का आक्रमण
सन 1025 ई. में
तुर्क आक्रमणकारी महमूद ग़ज़नवी ने सोमनाथ पर हमला किया।
उसने:
- मंदिर को लूटा,
- शिवलिंग को तोड़ा,
- अपार धन लूटकर ग़ज़नी ले गया।
यह आक्रमण भारतीय इतिहास के सबसे दुखद अध्यायों में गिना जाता है।
लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि
मंदिर को तोड़े जाने के कुछ ही वर्षों बाद
भारतीयों ने इसे फिर से बना लिया।
बार-बार टूटा, बार-बार बना
इतिहासकारों के अनुसार,
सोमनाथ मंदिर को कम से कम 16 बार तोड़ा गया।
हर बार:
- विदेशी आक्रमणकारी आए,
- मंदिर तोड़ा गया,
- लेकिन हर बार भारतीयों ने
उसे फिर से खड़ा कर दिया।
यह मंदिर
हार न मानने वाली भारतीय आत्मा का प्रतीक बन गया।
स्वतंत्र भारत में पुनर्निर्माण
भारत की आज़ादी के बाद
सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया गया।
इस कार्य में प्रमुख भूमिका निभाई:
- सरदार वल्लभभाई पटेल
- के. एम. मुंशी
1951 में
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने
नव-निर्मित सोमनाथ मंदिर का उद्घाटन किया।
उन्होंने कहा:
“यह मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं,
यह भारत के पुनर्जागरण का प्रतीक है।”
वर्तमान सोमनाथ मंदिर की विशेषताएँ
आज का सोमनाथ मंदिर
चालुक्य शैली की वास्तुकला में बना हुआ है।
मुख्य विशेषताएँ:
- मंदिर की ऊँचाई लगभग 50 मीटर
- शिखर पर स्थित कलश का वजन लगभग 10 टन
- समुद्र की ओर सीधा मुख
- गर्भगृह में दिव्य ज्योतिर्लिंग की स्थापना
मंदिर के पीछे स्थित
समुद्र दर्शन स्थल अत्यंत शांत और आध्यात्मिक अनुभव देता है।
धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
सोमनाथ केवल एक ज्योतिर्लिंग नहीं,
यह भारतीय संस्कृति की जिजीविषा का प्रतीक है।
यह मंदिर हमें सिखाता है कि:
- सभ्यताएँ नष्ट की जा सकती हैं,
- इमारतें गिराई जा सकती हैं,
- लेकिन आस्था और संस्कृति को मिटाया नहीं जा सकता।
हर वर्ष लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन के लिए आते हैं।
दर्शन के लिए महत्वपूर्ण बातें
यदि आप सोमनाथ मंदिर जाएँ, तो ध्यान रखें:
- सुबह और शाम की आरती विशेष मानी जाती है
- संध्या आरती के बाद होने वाला साउंड एंड लाइट शो अवश्य देखें
- समुद्र तट पर कुछ समय ध्यान और शांति में बिताएँ
- मंदिर परिसर में मर्यादा और शुद्धता बनाए रखें
निष्कर्ष
सोमनाथ मंदिर इतिहास की वह पुस्तक है
जिसके हर पन्ने पर
संघर्ष, आस्था और पुनर्निर्माण की कहानी लिखी है।
यह मंदिर हमें याद दिलाता है कि
जो सभ्यता अपनी आस्था से जुड़ी रहती है,
उसे कोई शक्ति हमेशा के लिए मिटा नहीं सकती।
सोमनाथ केवल एक मंदिर नहीं,
यह भारत की आत्मा का अटूट स्तंभ है।